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Bihar Flood News: भागलपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ की आशंका से गांवों में बनने लगीं लाखों रुपये की लकड़ी की नावें

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Alam Ki Khabar: भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की आशंका गहरा गई है। सबौर प्रखंड के संत नगर गांव में ग्रामीण लाखों रुपये खर्च कर लकड़ी की नाव तैयार कर रहे हैं ताकि बाढ़ के दौरान आवागमन, राहत और आजीविका प्रभावित न हो।

भागलपुर, 1 अगस्त। आलम की खबर: गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के साथ ही भागलपुर जिले के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ की आशंका गहराने लगी है। संभावित आपदा को देखते हुए लोग प्रशासनिक सहायता का इंतजार करने के बजाय अपनी पारंपरिक तैयारियों में जुट गए हैं। सबौर प्रखंड की रजनदीपुर पंचायत स्थित संत नगर गांव में इन दिनों लकड़ी की नाव बनाने का काम तेज़ी से चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ उनके लिए कोई नई स्थिति नहीं है, बल्कि हर वर्ष आने वाली चुनौती है, इसलिए समय रहते तैयारी करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

संत नगर के कई परिवार अपने स्तर पर नई नाव तैयार करवा रहे हैं, जबकि कुछ परिवार सामूहिक रूप से नाव बनवा रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर पूरे गांव के लोग उसका उपयोग कर सकें। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ के दिनों में सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और नाव ही जीवन की सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है। इसी के सहारे लोग सुरक्षित स्थानों तक पहुंचते हैं, बच्चों और महिलाओं को निकाला जाता है, बीमारों को अस्पताल पहुंचाया जाता है तथा खाद्यान्न और अन्य जरूरी सामान की ढुलाई होती है।

ग्रामीण बताते हैं कि पहले नाव बनवाने में अपेक्षाकृत कम खर्च आता था, लेकिन अब अच्छी गुणवत्ता की लकड़ी, मजदूरी और अन्य निर्माण सामग्री महंगी होने से एक मजबूत नाव तैयार कराने में करीब चार से पांच लाख रुपये तक खर्च करना पड़ता है। आर्थिक बोझ बढ़ने के बावजूद लोग इसे मजबूरी नहीं बल्कि सुरक्षा में निवेश मानते हैं, क्योंकि बाढ़ के दौरान यही नाव परिवार की रक्षा के साथ-साथ आय का भी महत्वपूर्ण साधन बन जाती है। कई लोग इसी नाव से जरूरतमंदों को नदी पार कराते हैं और इससे अतिरिक्त आमदनी भी होती है।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि गंगा का जलस्तर जैसे-जैसे ऊपर चढ़ता है, वैसे-वैसे लोगों की चिंता भी बढ़ जाती है। इसलिए इस बार भी जलस्तर बढ़ने के शुरुआती संकेत मिलते ही नाव निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया। उनका मानना है कि समय पर तैयारी रहने से बाढ़ आने पर नुकसान और परेशानियां काफी हद तक कम की जा सकती हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संभावित बाढ़ को देखते हुए पहले से राहत सामग्री का भंडारण किया जाए, ऊंचे स्थानों पर राहत शिविर तैयार किए जाएं, चिकित्सा टीमों की तैनाती सुनिश्चित हो और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त नावों की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ से जनजीवन प्रभावित होता है, इसलिए पूर्व तैयारी ही सबसे प्रभावी उपाय है।

उधर जिला प्रशासन भी गंगा नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है। संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जलस्तर में अचानक वृद्धि होने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके। फिलहाल तटवर्ती गांवों में लोग अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं और हर किसी की निगाह गंगा के बढ़ते जलस्तर पर टिकी हुई है।

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विशेष टिप्पणी

भागलपुर के संत नगर की तस्वीर यह बताती है कि बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों ने आपदा के साथ जीना सीख लिया है। यहां नाव केवल एक साधन नहीं बल्कि सुरक्षा, आजीविका और उम्मीद का प्रतीक है। यदि प्रशासन समय रहते राहत, पुनर्वास और स्थायी बाढ़ प्रबंधन पर प्रभावी कदम उठाए तो हर वर्ष होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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